और महायाजक और शास्त्री खड़े हुए तन मन से उस पर दोष लगाते रहे।
9वह उस ने बहुतेरी बातें पूछता रहा, पर उस ने उस को कुछ भी उत्तर न दिया।
10और महायाजक और शास्त्री खड़े हुए तन मन से उस पर दोष लगाते रहे।
12उसी दिन पीलातुस और हेरोदेस मित्रा हो गए। इसके पहिले वे एक दूसरे के बैरी थे।।
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