श्रेष्‍ठगीत 1:8

हे स्त्रियों में सुन्दरी, यदि तू यह न जानती हो तो भेड़- बकरियों के खुरों के चिन्हों पर चल और चरावाहों के तम्बुओं के पास अपनी बकरियों के बच्चों को चरा।।

प्रसंग सहित पढ़ें · श्रेष्‍ठगीत 1

6मुझे इसलिये न घूर कि मैं साँवली हूं, क्योंकि मैं धूप से झुलस गई। मेरी माता के पुत्रा मुझ से अप्रसन्न थे, उन्हों ने मुझ को दाख की बारियों की रखवालिन बनाया; परन्तु मैं ने अपनी निज दाख की बारी की रखवाली नहीं की!

7हे मेरे प्राणप्रिय मुझे बता, तू अपनी भेड़- बकरियां कहां चराता है, दोपहर को तू उन्हें कहां बैठाता है; मैं क्यों तेरे संगियों की भेड़- बकरियों के पास घूंघट काढ़े हुए भटकती फिरूं?

8हे स्त्रियों में सुन्दरी, यदि तू यह न जानती हो तो भेड़- बकरियों के खुरों के चिन्हों पर चल और चरावाहों के तम्बुओं के पास अपनी बकरियों के बच्चों को चरा।।

9हे मेरी प्रिय मैं ने तेरी तुलना फिरौन के रथों में जुती हुई घोड़ी से की है।

10तेरे गाल केशों के लटों के बीच क्या ही सुन्दर हैं, और तेरा कण्ठ हीरों की लड़ों के बीच।

श्रेष्‍ठगीत 1 पूरा पढ़ें

इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें

KJV தமிழ் తెలుగు ಕನ್ನಡ