दास बातों ही के द्वारा सुधारा नहीं जाता, क्योंकि वह समझदार भी नहीं मानता।
17अपने बेटे की ताड़ना कर, तब उस से तुझे चैन मिलेगा; और तेरा मन सुखी हो जाएगा।
19दास बातों ही के द्वारा सुधारा नहीं जाता, क्योंकि वह समझदार भी नहीं मानता।
20क्या तू बातें करने में उतावली करनेवाले मनुष्य को देखता है? उस से अधिक तो मूर्ख ही से आशा है।
21जो अपने दास को उसके लड़कपन से सुकुमारपन में पालता है, वह दास अन्त में उसका बेटा बन बैठता है।
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