व्यवस्थाविवरण 25:4

दांवते समय चलते हुए बैल का मुंह न बान्धना।

प्रसंग सहित पढ़ें · व्यवस्थाविवरण 25

2और यदि दोषी मार खाने के योग्य ठहरे, तो न्यायी उसको गिरवाकर अपने साम्हने जैसा उसका दोष हो उसके अनुसार कोड़े गिनकर लगवाए।

3वह उसे चालीस कोड़े तक लगवा सकता है, इस से अधिक नहीं लगवा सकता; ऐसा न हो कि इस से अधिक बहुत मार खिलवाने से तेरा भाई तेरी दृष्टि में तुच्छ ठहरे।।

4दांवते समय चलते हुए बैल का मुंह न बान्धना।

5जब कोई भाई संग रहते हों, और उन में से एक निपुत्रा मर जाए, तो उसकी स्त्री का ब्याह परगोत्री से न किया जाए; उसके पति का भाई उसके पास जाकर उसे अपनी पत्नी कर ले, और उस से पति के भाई का धर्म पालन करे।

6और जो पहिला बेटा उस स्त्री से उत्पन्न हो वह उस मरे हुए भाई के नाम का ठहरे, जिस से कि उसका नाम इस्राएल में से मिट न जाए।

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