और यहूदा और सीलास ने जो आप भी भविष्यद्वक्ता थे, बहुत बातों से भाइयों को उपदेश देकर स्थिर किया।
30फिर वे विदा होकर अन्ताकिया में पहुंचे, और सभा को इकट्ठी करके वह उन्हें पत्री दे दी।
31और वे पढ़कर उस उपदेश की बात से अति आनन्दित हुए।
32और यहूदा और सीलास ने जो आप भी भविष्यद्वक्ता थे, बहुत बातों से भाइयों को उपदेश देकर स्थिर किया।
33वे कुछ दिन रहकर भाइयों से शान्ति के साथ विदा हुए, कि अपने भेजनेवालों के पास जाएं।
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