तब उस ने कहा, उसे नीचे गिरा दो। सो उन्हों ने उसको नीचे गिरा दिया, और उसके लोहू के कुछ छींटे भीत पर और कुछ घोड़ों पर पड़े, और उन्हों ने उसको पांव से लताड़ दिया।
31जब येहू फाटक में होकर आ रहा था तब उस ने कहा, हे अपने स्वामी के घात करने वाले जिम्री, क्या कुशल है?
32तब उस ने खिड़की की ओर मुंह उठाकर पूछा, मेरी ओर कौन है? कौन? इस पर दो तीन खोजों ने उसकी ओर झांका।
33तब उस ने कहा, उसे नीचे गिरा दो। सो उन्हों ने उसको नीचे गिरा दिया, और उसके लोहू के कुछ छींटे भीत पर और कुछ घोड़ों पर पड़े, और उन्हों ने उसको पांव से लताड़ दिया।
35जब वे उसे मिट्टी देने गए, तब उसकी खोपड़ी पांवों और हथेलियों को छोड़कर उसका और कुछ न पाया।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें