कि तू मेरा अधर्म ढूंढ़ता, और मेरा पाप पूछता है?
4क्या तेरी देश्धारियों की सी बांखें है? और क्या तेरा देखना मनुष्य का सा है?
5क्या तेरे दिन मनुष्य के दिन के समान हैं, वा तेरे वर्ष पुरूष के समयों के तुल्य हैं,
6कि तू मेरा अधर्म ढूंढ़ता, और मेरा पाप पूछता है?
7तुझे तो मालूम ही है, कि मैं दुष्ट नहीं हूँ, और तेरे हाथ से कोई छुड़ानेवाला नहीं !
8तू ने अपने हाथों से मुझे ठीक रचा है और जोड़कर बनाया है; तौभी मुझे नाश किए डालता है।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें