क्या वह निष्फल वचनों से, वा व्यर्थ बातों से वादविवाद करे?
2क्या बुध्दिमान को उचित है कि अज्ञानता के साथ उत्तर दे, वा उपने अन्तेकरण को पूरबी पवन से भरे?
3क्या वह निष्फल वचनों से, वा व्यर्थ बातों से वादविवाद करे?
4वरन तू भय मानना छोड़ देता, और ईश्वर का ध्यान करना औरों से छुड़ाता है।
5तू अपने मुंह से अपना अधर्म प्रगट करता है, और धूर्त्त लोगों के बोलने की रीति पर बोलता है।
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