और अपनी स्त्री की बहिन को भी अपनी स्त्री करके उसकी सौत न करना, कि पहली के जीवित रहते हुए उसका तन भी उघाड़े।
16अपनी भौजी का तन न उघाड़ना; वह तो तुम्हारे भाई ही का तन है।
18और अपनी स्त्री की बहिन को भी अपनी स्त्री करके उसकी सौत न करना, कि पहली के जीवित रहते हुए उसका तन भी उघाड़े।
19फिर जब तक कोई स्त्री अपने ऋतु के कारण अशुद्ध रहे तब तक उसके पास उसका तन उघाड़ने को न जाना।
20फिर अपने भाई बन्धु की स्त्री से कुकर्म करके अशुद्ध न हो जाना।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें