और मैं कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश करे, और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।
10क्योंकि परमेश्वर की भक्ति ग्रहण करनेवाली स्त्रियों को यही उचित भी है।
11और स्त्री को चुपचाप पूरी आधीनता में सीखना चाहिए।
12और मैं कहता हूं, कि स्त्री न उपदेश करे, और न पुरूष पर आज्ञा चलाए, परन्तु चुपचाप रहे।
13क्योंकि आदम पहिले, उसके बाद हव्वा बनाई गई।
14और आदम बहकाया न गया, पर स्त्री बहकाने में आकर अपराधिनी हुई।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें