बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिस ने रेंड़ का पेड़ एसा काटा कि वह सूख गया।
5इस पर योना उस नगर से निकलकर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बनाकर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?
6तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगाकर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।
7बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिस ने रेंड़ का पेड़ एसा काटा कि वह सूख गया।
8जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहाकर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उस ने यह कहकर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।
9परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उस ने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।
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