इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है।
16यहोवा यों भी कहता है, सड़कों पर खडे होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्हों ने कहा, हम उस पर न चलेंगे।
17मैं ने तुम्हारे लिये पहरूए बैठाकर कहा, नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना ! पर उन्हों ने कहा, हम न सुनेंगे।
18इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है।
19हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊंगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्हों ने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्हों ने निकम्मी जाना है।
20मेरे लिये जो लोबान शबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्न नहीं हूँ, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।
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