हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है।
1क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाई सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं?
2हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है।
3यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाई लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है।
4हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं।
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