क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्त्रा से शरीर बढ़कर है।
21ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं।।
23क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्त्रा से शरीर बढ़कर है।
25तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्ता करने से अपनी अवस्था में ऐक घड़ी भी बड़ा सकता है?
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