और जो खून, और टोना, और व्यभिचार, और चोरियां, उन्हों ने की थीं, उन से मन न फिराया।।
19क्योंकि उन घोड़ों की सामर्थ उन के मुंह, और उन की पूंछों में थी; इसलिये कि उन की पूंछे सांपों की सी थीं, और उन पूंछों के सिर भी थे, और इन्हीं से वे पीड़ा पहुंचाते थे।
20और बाकी मनुष्यों ने जो उन मरियों से न मरे थे, अपने हाथों के कामों से मन न फिराया, कि दुष्टात्माओं की, और सोने और चान्दी, और पीतल, और पत्थर, और काठ की मूरतों की पूजा न करें, जो न देख, न सुन, न चल सकती हैं।
21और जो खून, और टोना, और व्यभिचार, और चोरियां, उन्हों ने की थीं, उन से मन न फिराया।।
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