और जो भीत कोठरियों के बाहर उनके पास पास थी अर्थात् कोठरियों के साम्हने बाहरी आंगन की ओर थी, उसकी लम्बाई पचास हाथ की थी।
5और उपरली कोठरियां छोटी थीं, अर्थात् छज्जों के कारण वे निचली और बिचली कोठरियों से छोटी थीं।
7और जो भीत कोठरियों के बाहर उनके पास पास थी अर्थात् कोठरियों के साम्हने बाहरी आंगन की ओर थी, उसकी लम्बाई पचास हाथ की थी।
8क्योंकि बाहरी आंगन की कोठरियां पचास हाथ लम्बी थीं, और मन्दिर के साम्हने की अलंग सौ हाथ की थी।
9और इन कोठरियों के नीचे पूर्व की ओर मार्ग था, जहां लोग बाहरी आंगन से इन में जाते थे।
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