वे जवानी में मर जाते हैं और उनका जीवन लूच्चों के बीच में नाश होता है।
12परन्तु यदि वे न सुनें, तो वे खड़ग से नाश हो जाते हैं, और अज्ञानता में मरते हैं।
13परन्तु वे जो मन ही मन भक्तिहीन होकर क्रोध बढ़ाते, और जब वह उनको बान्धता है, तब भी दोहाई नहीं देते,
14वे जवानी में मर जाते हैं और उनका जीवन लूच्चों के बीच में नाश होता है।
15वह दुख्यिों को उनके दु:ख से छुड़ाता है, और उपद्रव में उनका कान खोलता है।
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