यशायाह 54:4

मत डर, क्योंकि तेरी आशा फिर नहीं टूटेगी? मत घबरा, क्योंकि तू फिर लज्जित न होगी और तुझ पर सियाही न छाएगी? क्योंकि तू अपक्की जवानी की लज्जा भूल जाएगी, और, अपके विधवापन की नामधराई को फिर स्मरण न करेगी।

प्रसंग सहित पढ़ें · यशायाह 54

2अपने तम्बू का स्थान चौड़ा कर, और तेरे डेरे के पट लम्बे किए जाएं; हाथ मत रोक, रस्सियों को लम्बी और खूंटों को दृढ़ कर।

3क्योंकि तू दहिने- बाएं फैलेगी, और तेरा वंश जाति- जाति का अधिकारी होगा और उजड़े हुए नगरों को फिर से बसाएगा।।

4मत डर, क्योंकि तेरी आशा फिर नहीं टूटेगी? मत घबरा, क्योंकि तू फिर लज्जित न होगी और तुझ पर सियाही न छाएगी? क्योंकि तू अपक्की जवानी की लज्जा भूल जाएगी, और, अपके विधवापन की नामधराई को फिर स्मरण न करेगी।

5क्योंकि तेरा कर्त्ता तेरा पति है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; और इस्राएल का पवित्रा तेरा छुड़ानेवाला है, वह सारी पृथ्वी का भी परमेश्वर कहलाएगा।

6क्योंकि यहोवा ने तुझे ऐसा बुलाया है, मानो तू छोड़ी हुई और मन की दुखिया और जवानी की त्यागी हुई स्त्री हो, तेरे परमेश्वर का यही वचन है।

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