सो हम क्या कहें? क्या परमेश्वर के यहां अन्याय है? कदापि नहीं!
13जैसा लिखा है, कि मैं ने याकूब से प्रेम किया, परन्तु एसौ को अप्रिय जाना।।
14सो हम क्या कहें? क्या परमेश्वर के यहां अन्याय है? कदापि नहीं!
16सो यह न तो चाहनेवाले की, न दौड़नेवाले की परन्तु दया करनेवाले परमेश्वर की बात है।
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