(उन्हों ने उस से कहा; हे स्वामी, उसके पास दस मोहरें तो हैं)।
23तो तू ने मेरे रूपये कोठी में क्यों नहीं रख दिए, कि मैं आकर ब्याज समेत ले लेता?
24और जो लोग निकट खड़े थे, उस ने उन से कहा, वह मोहर उस से ले लो, और जिस के पास दस मोहरें हैं उसे दे दो।
25(उन्हों ने उस से कहा; हे स्वामी, उसके पास दस मोहरें तो हैं)।
26मैं तुम से कहता हूं, कि जिस के पास है, उसे दिया जाएगा; और जिस के पास नहीं, उस से वह भी जो उसके पास है ले लिया जाएगा।
27परन्तु मेरे उन बैरियों को जो नहीं चाहते थे कि मैं उन पर राज्य करूं, उन को यहां लाकर मेरे सामने घात करो।।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें