जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
14क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।।
15मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,
16जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
18अर्थात् उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं।।
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