मैं मन ही मन मोहित हो गया होता, और अपने मुंह से अपना हाथ चूम लिया होता;
25वा अपने बहुत से धन वा अपनी बड़ी कमाई के कारण आनन्द किया होता,
26वा सूर्य को चमकते वा चन्द्रमा को महाशोभा से चलते हुए देखकर
27मैं मन ही मन मोहित हो गया होता, और अपने मुंह से अपना हाथ चूम लिया होता;
29यदि मैं अपने बैरी के नाश से आनन्दित होता, वा जब उस पर विपत्ति पड़ी तब उस पर हंसा होता;
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