और करूबों को उस ने सोने से मढ़वाया।
26एक करूब की ऊंचाई दस हाथ की, और दूसरे की भी इतनी ही थी।
27और उस ने करूबों को भीतरवाले स्थान में धरवा दिया; और करूबों के पंख ऐसे फैले थे, कि एक करूब का एक पंख, एक भीत से, और दूसरे का दूसरा पंख, दूसरी भीत से लगा हुआ था, फिर उनके दूसरे दो पंख भवन के मध्य में एक दूसरे से लगे हुए थे।
28और करूबों को उस ने सोने से मढ़वाया।
29और उस ने भवन की भीतों में बाहर और भीतर चारों ओर करूब, खजूर और खिले हुए फूल खुदवाए।
30और भवन के भीतर और बाहरवाले फर्श उस ने सोने से मढ़वाए।
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