परन्तु उसका लोहू न खाना; उसे जल की नाई भूमि पर उंडेल देना।।
21परन्तु यदि उस में किसी प्रकार का दोष हो, अर्थात् वह लंगड़ा वा अन्धा हो, वा उस में किसी और ही प्रकार की बुराई का दोष हो, तो उसे अपने परमेश्वर यहोवा के लिये बलि न करना।
22उसको अपने फाटकों के भीतर खाना; शुद्ध और अशुद्ध दोनों प्रकार के मनुष्य जैसे चिकारे और हरिण का मांस खाते हैं वैसे ही उसका भी खा सकेंगे।
23परन्तु उसका लोहू न खाना; उसे जल की नाई भूमि पर उंडेल देना।।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें