जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहां हूं।
16और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
17जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहां हूं।
19अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्रा कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें