2 इतिहास 14:8

फिर आसा के पास ढाल और बछ रखनेवालों की एक सेना थी, अर्थात् यहूदा में से तो तीन लाख पुरूष और बिन्यामीन में से फरी रखनेवाले और धनुर्धारी दो लाख अस्सी हजार ये सब शूरवीर थे।

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6और उस ने यहूदा में गढ़वाले नगर बसाए, क्योंकि देश में चैन रहा। और उन बरसों में उसे किसी से लड़ाई न करनी पड़ी क्योंकि यहोवा ने उसे विश्राम दिया था।

7उस ने यहूदियों से कहा, आओ हम इन नगरों को बसाएं और उनके चारों ओर शहरपनाह, गढ़ और फाटकों के पल्ले और बेड़े बनाएं; देश अब तक हमारे साम्हने पड़ा है, क्योंकि हम ने, अपने परमेश्वर यहोवा की खोज की है हमने उसकी खोज की और उस ने हमको चारों ओर से विश्राम दिया है। तब उन्हों ने उन नगरों को बसाया और कृतार्थ हुए।

8फिर आसा के पास ढाल और बछ रखनेवालों की एक सेना थी, अर्थात् यहूदा में से तो तीन लाख पुरूष और बिन्यामीन में से फरी रखनेवाले और धनुर्धारी दो लाख अस्सी हजार ये सब शूरवीर थे।

9और उनके विरूद्ध दस लाख पुरूषों की सेना और तीन सौ रथ लिये हुए जेरह नाम एक कूशी निकला और मारेशा तक आ गया।

10तब आसा उसका साम्हना करने को चला और मारेशा के निकट सापता नाम तराई में युठ्ठ की पांति बान्धी गई।

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