यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करूणा सदा की है।
32हुआ है। समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें, मैदान और जो कुछ उस में है सो प्रफुल्लित हों।
33उसी समय वन के वृक्ष यहोवा के साम्हने जयजयकार करें, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है।
34यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करूणा सदा की है।
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