और एक सौ पचास दिन के पशचात् जल पृथ्वी पर से लगातार घटने लगा।
2और गहिरे समुद्र के सोते और आकाश के झरोखे बंद हो गए; और उस से जो वर्षा होती थी सो भी थम गई।
3और एक सौ पचास दिन के पशचात् जल पृथ्वी पर से लगातार घटने लगा।
4सातवें महीने के सत्तरहवें दिन को, जहाज अरारात नाम पहाड़ पर टिक गया।
5और जल दसवें महीने तक घटता चला गया, और दसवें महीने के पहिले दिन को, पहाड़ों की चोटियाँ दिखलाई दीं।
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