तब यहोवा के दूत ने यहोशू को चिताकर कहा,
4तब दूत ने उन से जो साम्हने खड़े थे कहा, इसके ये मैले वस्त्रा उतारो। फिर उस ने उस से कहा, देख, मैं ने तेरा अधर्म दूर किया है, और मैं तुझे सुन्दर वस्त्रा पहिना देता हूं।
5तब मैं ने कहा, इसके सिर पर एक शुद्ध पगड़ी रखी जाए। और उन्हों ने उसके सिर पर याजक के योग्य शुद्ध पगड़ी रखी, और उसको वस्त्रा पहिनाए; उस समय यहोवा का दूत पास खड़ा रहा।।
6तब यहोवा के दूत ने यहोशू को चिताकर कहा,
7सेनाओं का यहोवा तुझ से यों कहता है: यदि तू मेरे मार्गों पर चले, और जो कुछ मैं ने तुझे सौंप दिया है उसकी रक्षा करे, तो तू मेरे भवन का न्यायी, और मेरे आंगनों का रक्षक होगा; और मैं तुझ को इनके बीच में आने जाने दूंगा जो पास खड़े हैं।
8हे यहेाशू महायाजक, तू सुन ले, और तेरे भाईबन्धु जो तेरे साम्हने खड़े हैं वे भी सुनें, क्योंकि वे मनुष्य शुभ शकुन हैं: सुनो, मैं अपने दास शाख को प्रगट करूंगा।
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