हे मनुष्य के सन्तान, इन पुरूषों ने तो अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित कीं, और अपने अधर्म की ठोकर अपने साम्हने रखी है; फिर क्या वे मुझ से कुछ भी पूछने पाएंगे?
1फिर इस्राएल के कितने पुरनिये मेरे पास आकर मेरे साम्हने बैठ गए।
2तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
3हे मनुष्य के सन्तान, इन पुरूषों ने तो अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित कीं, और अपने अधर्म की ठोकर अपने साम्हने रखी है; फिर क्या वे मुझ से कुछ भी पूछने पाएंगे?
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें