जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्रा थे।
18और पाप से छुड़ाए जाकर धर्म के दास हो गए।
20जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्रा थे।
21सो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे?
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