तब परमेश्वर ने, नूह से कहा,
13फिर ऐसा हुआ कि छ: सौ एक वर्ष के पहिले महीने के पहिले दिन जल पृथ्वी पर से सूख गया। तब नूह ने जहाज़ की छत खोलकर क्या देखा कि धरती सूख गई है।
14और दूसरे महीने के सताईसवें दिन को पृथ्वी पूरी रीति से सूख गई।।
15तब परमेश्वर ने, नूह से कहा,
16तू अपने पुत्रों, पत्नी, और बहुओं समेत जहाज़ में से निकल आ।
17क्या पक्षी, क्या पशु, क्या सब भांति के रेंगनेवाले जन्तु जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, जितने शरीरधारी जीवजन्तु तेरे संग हैं, उस सब को अपने साथ निकाल ले आ, कि पृथ्वी पर उन से बहुत बच्चे उत्पन्न हों; और वे फूलें- फलें, और पृथ्वी पर फैल जाएं।
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