योना 4:4

यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?

प्रसंग सहित पढ़ें · योना 4

2और उस ने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करनेवाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।

3सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।

4यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?

5इस पर योना उस नगर से निकलकर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बनाकर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?

6तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगाकर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।

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