यदि कोई झूठी साक्षी देनेवाला किसी के विरूद्ध याहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,
14जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को देता है, उसका जो भाग तुझे मिलेगा, उस में किसी का सिवाना जिसे अगले लोगों ने ठहराया हो न हटाना।।
15किसी मनुष्य के विरूद्ध किसी प्रकार के अधर्म वा पाप के विषय में, चाहे उसका पाप कैसा ही क्यो न हो, एक ही जन की साक्षी न सुनना, परन्तु दो वा तीन साक्षीयों के कहने से बात पक्की ठहरे।
16यदि कोई झूठी साक्षी देनेवाला किसी के विरूद्ध याहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,
17तो वे दोनों मनुष्य, जिनके बीच ऐसा मुक मा उठा हो, यहोवा के सम्मुख, अर्थात् उन दिनों के याजकों और न्यायियों के साम्हने खड़े किए जाएं;
18तब न्यायी भली भांति पूछपाछ करें, और यदि यह निर्णय पाए कि वह झूठा साक्षी है, और अपने भाई के विरूद्ध झूठी साक्षी दी है
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